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Indus Valley Civilization Notes in Hindi (सिंधु घाटी सभ्यता) for SSC

Rahul Kumar

SSC Exam Expert & Content Editor

Updated 03 Oct 2026

PDF Notes: Indus Valley Civilization Notes in Hindi (सिंधु घाटी सभ्यता) for SSC

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सिंधु घाटी सभ्यता (हड़प्पा सभ्यता) प्राचीन भारतीय इतिहास का सबसे महत्वपूर्ण टॉपिक है। SSC CGL, CHSL, MTS और अन्य परीक्षाओं में हर साल इससे स्थल, खोजकर्ता, नदियों और विशेषताओं पर एक-दो सीधे प्रश्न पूछे जाते हैं। ये नोट्स इस विषय को सरल भाषा में, तालिकाओं और अभ्यास प्रश्नों के साथ बिंदुवार समझाते हैं, ठीक वैसे जैसे एक शिक्षक परीक्षा से पहले दोहराव कराता है।

Introduction और Time Period

  • यह भारतीय उपमहाद्वीप की पहली Urban Civilization थी और Bronze Age से संबंधित है।
  • Mature (Urban) Phase लगभग 2600 से 1900 ईसा पूर्व माना जाता है। प्रारंभिक चरण लगभग 3300 से 2600 ईसा पूर्व और उत्तर चरण लगभग 1900 से 1300 ईसा पूर्व है।
  • इसका विस्तार लगभग 13 लाख वर्ग किलोमीटर में था, जो समकालीन मिस्र और मेसोपोटामिया की सभ्यताओं से बड़ा है।
  • विश्व की अन्य प्राचीन सभ्यताएँ: मेसोपोटामिया (दजला-फरात), मिस्र (नील) और चीन (ह्वांगहो)।
  • इसे हड़प्पा सभ्यता इसलिए कहते हैं क्योंकि सबसे पहले हड़प्पा की खोज हुई, और सिंधु घाटी सभ्यता इसलिए कि शुरुआती स्थल सिंधु घाटी में मिले।

सभ्यता की Discovery

वर्षघटना / व्यक्ति
1826चार्ल्स मैसन ने हड़प्पा के खंडहरों का सबसे पहले उल्लेख किया
1856ब्रंटन बंधुओं ने लाहौर-मुल्तान रेल लाइन में हड़प्पा की ईंटें गिट्टी के रूप में प्रयोग कीं
1921दयाराम साहनी ने हड़प्पा की खोज की (रावी नदी, अब पाकिस्तान)
1922आर.डी. (राखालदास) बनर्जी ने मोहनजोदड़ो की खोज की (सिंधु नदी, सिंध)
1924सर जॉन मार्शल (ASI के महानिदेशक) ने सभ्यता की घोषणा की
1931एन.जी. मजूमदार ने चन्हूदड़ो खोजा; बाद में मैके ने उत्खनन किया
1946मोर्टिमर व्हीलर ने हड़प्पा और मोहनजोदड़ो में उत्खनन किया
1953ए. घोष ने कालीबंगा (राजस्थान) की खोज की
1954-55एस.आर. राव ने लोथल (गुजरात) की खोज और उत्खनन किया
1967-68जे.पी. जोशी ने धोलावीरा खोजा; 1990 से 2005 तक आर.एस. बिष्ट ने उत्खनन किया
1974जीन-फ्रांस्वा जैरिज ने मेहरगढ़ (बलूचिस्तान) में उत्खनन किया, जो हड़प्पा-पूर्व नवपाषाण स्थल है

Extent और Important Sites

सभ्यता वर्तमान पाकिस्तान, उत्तर-पश्चिम भारत और अफगानिस्तान के कुछ भागों में फैली थी। चार चरम बिंदु हैं: उत्तर में मांडा (जम्मू-कश्मीर, चिनाब), दक्षिण में दायमाबाद (महाराष्ट्र, प्रवरा), पश्चिम में सुत्कागेंडोर (बलूचिस्तान, दश्त नदी) और पूर्व में आलमगीरपुर (उत्तर प्रदेश, हिंडन)।

स्थलनदी / स्थानविशेषताएँ
हड़प्पारावी, पंजाब (पाकिस्तान)छह-छह की दो पंक्तियों में Granary, श्रमिक आवास, कब्रिस्तान H और R-37, लाल बलुआ पत्थर का पुरुष धड़
मोहनजोदड़ोसिंधु, सिंध (पाकिस्तान)Great Bath, Granary, पशुपति Seal, Bronze Dancing Girl, दाढ़ीवाले पुरुष की मूर्ति
चन्हूदड़ोसिंधु, सिंध (पाकिस्तान)एकमात्र नगर जहाँ दुर्ग नहीं था; मनका बनाने का केंद्र; दवात, लिपस्टिक
कालीबंगाघग्घर, राजस्थानFire Altars, जुता हुआ खेत, ऊँट की हड्डियाँ, घरों में कुएँ; नाम का अर्थ काली चूड़ियाँ
लोथलभोगवा, गुजरातDockyard, चावल की भूसी, युगल शवाधान, मनका कारखाना
धोलावीराखदिर द्वीप, कच्छ, गुजराततीन भागों में नगर, जलाशय, स्टेडियम, साइनबोर्ड; UNESCO World Heritage (2021)
राखीगढ़ीघग्घर, हरियाणाभारत के सबसे बड़े हड़प्पाई स्थलों में से एक
बनावलीहरियाणाजौ, खिलौना हल, अर-आकार की सड़कें
सुरकोटदागुजरातघोड़े की हड्डियों के अवशेष (विवादित), किलाबंद गढ़ी
रोपड़सतलज, पंजाबस्वतंत्र भारत में खोदा गया पहला स्थल (1953); मानव के साथ कुत्ते का शवाधान
कोट दीजीसिंधु, सिंध (पाकिस्तान)हड़प्पा-पूर्व चरण, Fire से विनाश के प्रमाण
बालाकोटपाकिस्तानसीप उद्योग का केंद्र
मेहरगढ़बोलन, बलूचिस्तान (पाकिस्तान)हड़प्पा-पूर्व नवपाषाण कृषि गाँव (लगभग 7000 ई.पू.), गेहूँ, जौ और कपास

Town Planning और Architecture

  • नगर Grid Pattern पर बने थे; सड़कें एक-दूसरे को समकोण पर काटती थीं।
  • प्रत्येक नगर के दो भाग थे: गढ़ (ऊँचा और किलाबंद, पश्चिम में) और निचला नगर (पूर्व में)। धोलावीरा के तीन भाग थे।
  • मकान पक्की ईंटों के बने थे जिनका मानक अनुपात 4:2:1 (लंबाई : चौड़ाई : ऊँचाई) था। मकानों में आँगन, निजी कुएँ और स्नानघर होते थे।
  • सड़कों के किनारे covered Drainage System थी, जिसमें सफाई के लिए मैनहोल थे। इसे अपने समय की सबसे उन्नत प्रणाली माना जाता है।
  • Great Bath (मोहनजोदड़ो): लगभग 12 मीटर लंबा, 7 मीटर चौड़ा और 2.4 मीटर गहरा जलकुंड, जिसे बिटुमेन से जलरोधी बनाया गया था। संभवतः धार्मिक स्नान के लिए प्रयोग होता था।
  • Granary हड़प्पा, मोहनजोदड़ो और लोथल में मिले हैं।
  • मंदिर या महल के स्पष्ट प्रमाण नहीं मिले।

Economy

Agriculture और Animals

  • फसलें: गेहूँ, जौ, मटर, मसूर, तिल, सरसों, खजूर, खरबूजा; कपास की खेती होती थी (यूनानी इसे सिंडन कहते थे); चावल के प्रमाण लोथल और रंगपुर में हैं।
  • बनावली से खिलौना हल और कालीबंगा से जुता हुआ खेत मिला है। सिंचाई मुख्यतः नदियों पर आधारित थी।
  • पाले गए पशु: कूबड़वाला बैल, भैंस, भेड़, बकरी, सूअर, कुत्ता, बिल्ली, मुर्गा और हाथी। कालीबंगा में ऊँट के साक्ष्य हैं। घोड़े के स्पष्ट प्रमाण नहीं हैं।

Crafts, Metals और Trade

  • ज्ञात धातुएँ: तांबा, काँसा, टिन, सोना, चाँदी। लोहा अज्ञात था। काँसे की ढलाई में लुप्त-मोम (सिरे परदू) तकनीक का प्रयोग हुआ।
  • मनका बनाना प्रमुख शिल्प था (चन्हूदड़ो और लोथल के कार्नेलियन मनके)। मिट्टी के बर्तन चाक पर बनते थे, लाल रंग पर काले चित्र।
  • बाट 16 के गुणकों में थे (1, 2, 4, 8, 16, 32, 64, 160, 320, 640...) और चर्ट पत्थर के बने थे। हाथीदाँत और सीप के पैमाने भी मिले हैं।
  • व्यापार के लिए स्टेटाइट (मुलायम पत्थर) की Seals प्रयोग होती थीं। मुहरों पर सबसे अधिक चित्रित पशु एकसिंगी बैल (यूनिकॉर्न) है।
  • व्यापार साझेदार: मेसोपोटामिया (सिंधु क्षेत्र का नाम मेलुहा), दिलमुन (बहरीन), मगन (ओमान), अफगानिस्तान और मध्य एशिया। अफगानिस्तान के शोर्तुघई में हड़प्पाई व्यापारिक बस्ती थी (लाजवर्द के लिए)।
  • कच्चे माल के स्रोत: तांबा खेतड़ी (राजस्थान), टिन और लाजवर्द अफगानिस्तान, कार्नेलियन गुजरात, सीप तटीय क्षेत्र।

Society, Religion और Art

  • राजा का कोई प्रमाण नहीं; कुछ विद्वान व्यापारी और पुरोहित वर्ग के शासन का अनुमान लगाते हैं। मकानों के आकार में अंतर से कुछ असमानता दिखती है।
  • Mother Goddess की पूजा के प्रमाण टेराकोटा की नारी मूर्तियों से मिलते हैं। पशुपति (आद्य-शिव) Seal में सींगों वाली आकृति पशुओं से घिरी है। वृक्ष पूजा (पीपल), पशु पूजा, लिंग पूजा और स्वस्तिक चिह्न भी मिलते हैं।
  • कालीबंगा और लोथल में Fire Altars मिली हैं, जो अनुष्ठान की ओर संकेत करती हैं।
  • शवाधान: अधिकतर लंबवत शवाधान, साथ में मिट्टी के बर्तन और आभूषण। लोथल में युगल शवाधान और हड़प्पा में कब्रिस्तान R-37 मिला।
  • Bronze Dancing Girl (मोहनजोदड़ो), दाढ़ीवाले पुरुष की स्टेटाइट मूर्ति (मोहनजोदड़ो), लाल बलुआ पत्थर का धड़ (हड़प्पा) और खिलौना गाड़ियाँ प्रसिद्ध कलाकृतियाँ हैं।
  • Script: चित्रात्मक, लगभग 400 से 450 चिह्न, अधिकतर दाएँ से बाएँ (कुछ मुहरों में बूस्ट्रोफेडन) और Undeciphered।

Decline of the Civilization (पतन के कारण)

  • घग्घर-हाकरा (सरस्वती) नदी तंत्र का सूखना और जलवायु परिवर्तन (कमजोर मानसून)।
  • सिंधु मैदान में बार-बार बाढ़ (मोहनजोदड़ो में बाढ़ की परतें मिली हैं) और नदियों का मार्ग बदलना।
  • मेसोपोटामिया से व्यापार में गिरावट, नगरीय Economy का पतन और लोगों का पूर्व और दक्षिण के छोटे गाँवों में पलायन।
  • आर्यों के आक्रमण का पुराना सिद्धांत (मोर्टिमर व्हीलर) अधिकांश आधुनिक विद्वान स्वीकार नहीं करते, क्योंकि हिंसा के प्रमाण कमजोर हैं।

Quick Revision Table: Sites और Discoverers

स्थलखोजकर्तावर्ष
हड़प्पादयाराम साहनी1921
मोहनजोदड़ोआर.डी. बनर्जी1922
चन्हूदड़ोएन.जी. मजूमदार1931
कालीबंगाए. घोष1953
लोथलएस.आर. राव1954
धोलावीराजे.पी. जोशी1967-68
रोपड़वाई.डी. शर्मा1953

One-Line Important Facts

  • Great Bath: मोहनजोदड़ो। Dockyard: लोथल। Fire Altars: कालीबंगा, लोथल। स्टेडियम और जल प्रणाली: धोलावीरा।
  • दुर्ग रहित एकमात्र नगर: चन्हूदड़ो। सीप उद्योग: बालाकोट। जुता हुआ खेत: कालीबंगा।
  • हड़प्पावासी मंदिर नहीं बनाते थे, लोहे से अपरिचित थे और संभवतः घोड़े का प्रयोग नहीं करते थे।
  • धोलावीरा 2021 में यूनेस्को सूची में शामिल हुआ, भारत का 40वाँ World Heritage स्थल।
  • कुल मिलाकर सबसे बड़ा हड़प्पाई नगर मोहनजोदड़ो है; भारत में राखीगढ़ी।

Practice Questions (Answers के साथ)

  1. हड़प्पा की खोज किसने की? Answer: दयाराम साहनी
  2. किस स्थल पर Dockyard मिली है? Answer: लोथल
  3. Great Bath कहाँ मिला? Answer: मोहनजोदड़ो
  4. घग्घर नदी पर स्थित अग्निवेदियों वाला स्थल कौन-सा है? Answer: कालीबंगा
  5. किस हड़प्पाई नगर में दुर्ग नहीं था? Answer: चन्हूदड़ो
  6. हड़प्पावासियों को किस धातु का ज्ञान नहीं था? Answer: लोहा
  7. हड़प्पाई ईंटों का मानक अनुपात क्या था? Answer: 4:2:1
  8. मेसोपोटामिया के लेखों में सिंधु क्षेत्र को क्या कहा गया? Answer: मेलुहा
  9. 2021 में UNESCO World Heritage सूची में कौन-सा हड़प्पाई स्थल शामिल हुआ? Answer: धोलावीरा
  10. सिंधु घाटी सभ्यता का सबसे दक्षिणी स्थल कौन सा है? Answer: दायमाबाद

इसके बाद प्रागैतिहासिक काल के नोट्स पढ़ें और हमारे पिछले वर्षों के प्रश्न-पत्रों से अभ्यास करें। इसका अंग्रेज़ी संस्करण भी उपलब्ध है।

Frequently Asked Questions (FAQ)

सिंधु घाटी सभ्यता क्या है?

सिंधु घाटी सभ्यता, जिसे हड़प्पा सभ्यता भी कहते हैं, भारतीय उपमहाद्वीप की पहली Urban Civilization थी। यह मुख्यतः सिंधु और घग्घर-हाकरा नदी तंत्र के आसपास फैली थी और इसका परिपक्व चरण लगभग 2600 से 1900 ईसा पूर्व माना जाता है। यह कांस्य युगीन सभ्यता थी, जो योजनाबद्ध नगरों, जल निकासी, मानक बाट-माप और Undeciphered Script के लिए जानी जाती है।

इसे हड़प्पा सभ्यता क्यों कहा जाता है?

पुरातत्व में किसी संस्कृति का नाम उस पहले स्थल पर रखा जाता है जहाँ वह खोजी गई हो। हड़प्पा सबसे पहले (1921 में) खोजा गया स्थल था, इसलिए इसे हड़प्पा सभ्यता कहा जाता है। शुरुआती स्थल सिंधु घाटी में मिले थे, इसलिए इसे सिंधु घाटी सभ्यता भी कहते हैं।

हड़प्पा और मोहनजोदड़ो की खोज किसने की?

हड़प्पा की खोज 1921 में दयाराम साहनी ने और मोहनजोदड़ो की खोज 1922 में राखालदास (आर.डी.) बनर्जी ने की। 1924 में तत्कालीन भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) के महानिदेशक सर जॉन मार्शल ने इस सभ्यता की घोषणा दुनिया के सामने की।

मोहनजोदड़ो का अर्थ क्या है?

मोहनजोदड़ो का अर्थ सिंधी भाषा में "मृतकों का टीला" है। यह पाकिस्तान के सिंध प्रांत के लरकाना जिले में सिंधु नदी के तट पर स्थित है।

हड़प्पा Town Planning की मुख्य विशेषताएँ क्या थीं?

नगर Grid Pattern पर बने थे, सड़कें एक-दूसरे को समकोण पर काटती थीं। नगर दो भागों में बँटा था: पश्चिम में ऊँचा गढ़ (दुर्ग) और पूर्व में निचला नगर। पक्की ईंटों का मानक अनुपात 4:2:1 था, ढकी हुई नालियाँ, कुएँ तथा Great Bath और Granary जैसे सार्वजनिक भवन थे।

भारत में सबसे बड़ा हड़प्पाई स्थल कौन सा है?

हरियाणा (हिसार) का राखीगढ़ी सामान्यतः भारत का सबसे बड़ा हड़प्पाई स्थल माना जाता है। गुजरात का धोलावीरा अपनी जल-संरक्षण प्रणाली और तीन भागों में बँटे नगर के लिए सबसे प्रसिद्ध है।

किस हड़प्पाई स्थल पर Dockyard मिली है?

गुजरात के लोथल में, भोगवा नदी के किनारे, खंभात की खाड़ी के निकट ईंटों से बनी Dockyard मिली है। यह प्रमुख बंदरगाह और मनका (बीड्स) बनाने का केंद्र था। एस.आर. राव ने 1955 से यहाँ उत्खनन किया।

धोलावीरा क्यों महत्वपूर्ण है?

कच्छ के रण में खदिर द्वीप पर स्थित धोलावीरा तीन भागों (गढ़, मध्य नगर, निचला नगर) में बँटा है, यहाँ जलाशयों और नालियों की उन्नत व्यवस्था है और दस बड़े चिह्नों वाला साइनबोर्ड मिला है। 2021 में इसे UNESCO World Heritage सूची में शामिल किया गया, और यह भारत का पहला हड़प्पाई स्थल है जिसे यह दर्जा मिला।

पशुपति Seal क्या है?

यह मोहनजोदड़ो से मिली स्टेटाइट की Seal है जिसमें योग मुद्रा में बैठी, सींगों वाली आकृति पशुओं से घिरी दिखाई गई है। सर जॉन मार्शल ने इसे आद्य-शिव (Proto-Shiva) कहा, हालांकि इस पर मतभेद हैं।

हड़प्पावासी कौन-सी फसलें उगाते थे?

वे गेहूँ, जौ, मटर, तिल, सरसों, खजूर और कपास उगाते थे। चावल के साक्ष्य लोथल और रंगपुर से मिले हैं। कपास के कारण यूनानी इसे "सिंडन" कहते थे। उन्हें लोहे का ज्ञान नहीं था।

क्या हड़प्पावासियों को घोड़े और लोहे का ज्ञान था?

परिपक्व हड़प्पा चरण में घोड़े के स्पष्ट प्रमाण नहीं हैं (सुरकोटदा से मिली हड्डियों पर विवाद है) और लोहा अज्ञात था। वे तांबा, काँसा, टिन, सोना और चाँदी का उपयोग करते थे।

सिंधु घाटी सभ्यता की Script कैसी थी?

Script चित्रात्मक थी जिसमें लगभग 400 से 450 चिह्न हैं। यह मुख्यतः मुहरों पर मिलती है और अधिकतर दाएँ से बाएँ लिखी गई है। इसे अब तक पढ़ा नहीं जा सका है, इसलिए इस सभ्यता की जानकारी पुरातात्विक साक्ष्यों से मिलती है।

हड़प्पावासियों का व्यापार किन क्षेत्रों से होता था?

मेसोपोटामिया (जहाँ सिंधु क्षेत्र को मेलुहा कहा गया), दिलमुन (बहरीन) और मगन (ओमान) से। निर्यात में मनके, सूती कपड़ा, हाथीदाँत और सीप की वस्तुएँ थीं, जबकि चाँदी, टिन और लाजवर्द आयात होते थे।

हड़प्पा सभ्यता के पतन के संभावित कारण क्या हैं?

घग्घर-हाकरा नदी का सूखना और जलवायु परिवर्तन, सिंधु मैदान में बार-बार बाढ़, नदियों का मार्ग बदलना, मेसोपोटामिया से व्यापार में गिरावट और नगरीय जीवन का क्रमिक बिखराव। मोर्टिमर व्हीलर का आर्य आक्रमण सिद्धांत अब अधिकांश विद्वान स्वीकार नहीं करते।

कौन-से हड़प्पाई स्थल पाकिस्तान में और कौन-से भारत में हैं?

पाकिस्तान में: हड़प्पा, मोहनजोदड़ो, चन्हूदड़ो, कोट दीजी, सुत्कागेंडोर और बालाकोट। भारत में: कालीबंगा, लोथल, धोलावीरा, राखीगढ़ी, बनावली, रोपड़, सुरकोटदा, आलमगीरपुर और मांडा।

सिंधु घाटी सभ्यता का विस्तार कितना था?

उत्तर में मांडा (जम्मू), दक्षिण में दायमाबाद (महाराष्ट्र), पश्चिम में सुत्कागेंडोर (बलूचिस्तान) और पूर्व में आलमगीरपुर (उत्तर प्रदेश) इसके चरम स्थल हैं।

SSC परीक्षा में इस टॉपिक से कौन-से प्रश्न आते हैं?

स्थल और नदी की जोड़ियाँ, खोजकर्ता, Town Planning, Great Bath और नर्तकी की मूर्ति जैसे अवशेष, व्यापार, धर्म और पतन के कारण। इन नोट्स की तालिकाएँ इन सभी को कवर करती हैं।

About the Author

Rahul Kumar

SSC Exam Expert & Content Editor

Rahul is a senior SSC exam strategist with 8+ years of experience helping aspirants crack CGL, CHSL and MTS exams. He writes in-depth notification breakdowns, exam pattern guides and preparation strategies.